मेरा सरमाया हुआ

रात में रौशनी से नहाया हुआ,

महताब भी है, क्या शर्माया हुआ,

मिले जो हमनवा रात रास्ते पे,

बचपना काँधे चढ़कर आया हुआ,

गले एक रोज़ काँधे पे हाथ तेरा,

जो मिला, जन्नत का साया हुआ,

उम्र भर रास्ते पे चलते हुए सोचा,

किस क़दर ढूँढूँ, जो जाया हुआ,

जिस्म में रूह, कहीं तो छुपी होगी,

निकालो जो भी है दफ़नाया हुआ;

नब्ज़ ये महसूस कर के कहती है,

हमें मालूम है, कौन है आया हुआ;

‘सौरभ’ मिल लिए जो गले तुमसे,

जहाँ अब तो मेरा सरमाया हुआ ।।

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