घर की दीवारी

भीतर अंदर घर की दीवारी,

दुबक के बैठा, सपना भारी,

दोनों घुटनों के दरमियाँ में,

सिसकतीं सांसें, बारी बारी I

 

तुम बतलाते, आस बड़ी है,

जीवन छोटा, प्यास बड़ी है,

नन्ही कलाई, जान न पायी,

कुआँ है गहरा, गगरी भारी I

 

भीतर अंदर, घर की दीवारी,…

 

चारों पहर, ताक को ताके,

अगल बगल,  दीवारें नापे,

एक झरोखा, उड़ जाने का,

देता है न्योता, दिन दोपहरी ,

 

भीतर अंदर घर की दीवारी…

 

नाखूनों से खुरच खुरच कर,

गहरे काढ़े, बरस बरस भर,

सप्तरंग के, स्वप्न उमंग के,

आँख उठा अब दिखला री I

 

भीतर अंदर घर की दीवारी…

 

खारा पानी, सब बह जाए,

नयन ज्योति, भी जग जाये,

आत्मबल से, मन प्रबल से,

बिखर जरा, मिटा अंधियारी I

 

भीतर अंदर घर की दीवारी…

 

चोंच में सपने, अपने दबाके,

नन्हें नन्हें से, ये पँख बढ़ाके,

भूल के सब, अबकी ‘सौरभ’

दीवार के ऊपर, उड़ जा री 

 

भीतर अंदर घर की दीवारी…

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