बूँद बूँद पकड़ी, खड़ा हो गया,
पँख लगा कर, बड़ा हो गया,
प्यास बुझाता, घड़ा हो गया,
अंकुर जड़ों पर खड़ा हो गया,
वो कभी आँगन, बइयाँ चला,
दुलारा, माँ की कनैय्याँ पला,
पल पल चला, पल पल पला,
पालकों पे पाला, ये चुलबुला,
लहरा,फहरा, श्वेतांबर आँचल,
लुकता छिपता, नटखट बादल,
चित मन आतुर, अतिशय चंचल,
प्रेम पुरोहित, पुष्पित सद संदल,
नयन की ज्योति, प्रज्ज्वल हुआ,
दिव्य दिवाकर, उज्जवल हुआ,
‘सौरभ’ हृदय ये कलकल हुआ,
आयान अम्बर, ये पल पल हुआ ।।

