वो रिश्ते खास होते हैं

साथ होते है, जब पास होते हैं,

बस वही रिश्ते तो ख़ास होते हैं,

हम तो ओढ़ कर हर पल उनका,

जी लेते है जब भी उदास होते हैं ।

 

ख़ामोशियाँ, सीने पे सर रख कर,

कह देती हैं सब, कुछ ना कहकर,

आँखें दिल को भिगो ही देतीं है,

जब भी गले तक जज़्बात होते हैं ।

 

घर के एक दूर कोने में होती है,

दुबकी सी, मगर ख़ुशी होती है,

साफ़ कर के, सभी गिले शिकवे,

ढूँढ लें, जब वो आसपास होते हैं ।

 

बुझे दिलों में वो उम्मीद बाक़ी है,

रौशन हों ये तलब-दीद बाक़ी हैं

ज़रा चिरागों से कहो, ख़ूब जलें,

अन्धेरों के कयी अन्दाज़ होते हैं ।

 

वजह भी कोई, दरमियाँ ना हों,

जो हों तो हम हों, दूरियाँ ना हों,

रूह को जिस्मों से, पैवस्त करें,

‘सौरभ’ ऐसे भी लिबास होते हैं।

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