हे नीलकंठ, योगेश, महेश,
हे दिव्यमान, अर्धनारीश्वर,
हे त्रिशूलधारी, त्रिलोकिनरेश,
हे चंद्रधारी, तुम जो धूधेश्वर,
कित् कारण, हो तुम मृत्युंजय,
तुम अमरनाथ, हो अनादि अमर,
दिशा दिखाओ सत्य, अभय,
कंठ सर्पमाल्य, तृष्णा आतुर,
निर्भय निर्वाण के, हे! निर्माता,
मोक्ष विधान के हे! रचनाकर,
कित् विधि, ज्योति अख्याता,
अलख, दीप्त, हे ! अभ्यंकर,
चित् प्रमाद, है भ्रमित, भावेश,
छिन्न भिन्न, जग, जोगेश्वर,
क्यूँ प्रलयनाथ, किंच आवेश,
अन्त अताह, करो, मुक्तेश्वर,
हे महाप्राण ! हे मुक्तिबोध !
जटा जड़ो, साधो सर्वेश्वर,
प्रज्ञा परिमल, अति अबोध,
मन मृदुल मान, मनकामेश्वर,
नटराज नमो, सृष्टि सुरमय,
जीवन सत्य, यत् मृत्युआंतर,
‘सौरभ’ प्रतिपल प्राण अमय,
एकात्म साध्य सखा, संगमेश्वर !

