नभ विचरित

स्मिता यत्र नभ विचरित,

व्योम विभाकर आनंदित,

अरुणिम आभा चित्रप्रभा,

पंख पसारे प्रफुल्ल प्रद्,

प्रपुष्पित हो देवाय पुंज,

किलकिलाती काय कुंज,

लालायित मुग्ध लावण्या,

ललित लताभूषण मड़ियाँ,

प्रथम प्रहर फहर छितरायी,

आरम्भ आरोहिणी दिव्यायी,

मधुरित मंचन मनोरमा,

स्वाधीन धर्म उत्प्रेरणा,

पीयूख परमहत वरदायी,

मुदित मायावनी मुस्कायी,

दाक्षिण्य दिव्य दशांग मय,

आवाहन अभिजात्य अभय,

‘सौरभ’ निर्मल करुणामयी,

मन ब्रह्मा सदा हो वरदायी ।।

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