Poetry

कजरी के जैसी शाम हुई

कजरी के जैसी शाम हुई, दोपहर भी उसके नाम हुई, भर आयी आँख गगन की, बदरी बिखर के तमाम हुई, तड़पें अंदर, अगन समंदर, बह भी ना; पाए पिघलकर, ऐसे प्रीत उबल के निकली मेघा धुल गयी, तमाम हुई, गगन भी तो छितरा छितरा, बिन बदरी, बिखरा बिखरा, कब आएगी, बह जाने को, छत ओढ़ […]

अम्बर आज,विस्तार बहो उस कारण, इस धार अहो।

अम्बर आज,विस्तार बहो उस कारण, इस धार अहो। चंद्र दिवाकर, तेरे भूषण नव नलिनी, कंचन, कण-कण, रस माधुरी, मेघ, मयार१ बढ़ो ।। अम्बर आज.. लवण लूतरा२, लम्पट बादल मचल चूमता, धरती आँचल धारा अति अवधार बहो अम्बर आज.. तृप्त धरा हो, मुक्त ज़रा हो जीवन पोषिणी, वसुन्धरा हो तुम जीवन उपहार बनो, अम्बर आज.. तन […]

eid

बहुत बहुत ईद मुबारक!!

दरवाज़ों पर पढ़ा था मैंने, लिखा था, आना तो दिल खोल आना, जो क़दमों में घबराहट दें, ऐसी ज़ंजीरों को भी ज़रा खोल आना, रोज़ रोज़ लौटने का तुम, कुछ नया बहाना भी अब खोज लाना, जो बुलाते हो फ़रिश्ते भी, कहना फ़ुर्सत में और किसी रोज़ आना, ईद के दिन गले मिलना, नज़र उठाना, […]

छू आयी है…..

छू आयी है उन कणों को, जो गहरे छिपे हुए सुरम्य, नरम से आकाश में बहते, कभी ललिमा के से लाल, या घन गहरे घुले कत्थयी, या फिर सुरमयी रजनी को, धुल कर, बिखरते जाते हैं,   छू आयी है उन कणों को, जो व्यापित हो चेतना में, अपनी कोमल डंठलों से, जल कण का […]

मेरा सरमाया हुआ

रात में रौशनी से नहाया हुआ, महताब भी है, क्या शर्माया हुआ, मिले जो हमनवा रात रास्ते पे, बचपना काँधे चढ़कर आया हुआ, गले एक रोज़ काँधे पे हाथ तेरा, जो मिला, जन्नत का साया हुआ, उम्र भर रास्ते पे चलते हुए सोचा, किस क़दर ढूँढूँ, जो जाया हुआ, जिस्म में रूह, कहीं तो छुपी […]

अब तो कहने को बस, ये ही अदब है

तुम पियो तो जानिब, मेरे होश गुमाँ, ख़ुश्क होती हुई, साँसो को तलब है,   तुम्हारे तर लबों पर, मिलतीं मयकदा, और कहीं जाऊँ, आदत तो अजब है,   गुज़रता रहता हूँ, मैं आवाज़ के बिना, अब तो कहने को बस, ये ही अदब है,   तेरे दरवाज़े पर, रखता चलूँ निगाह, सुना है घर […]

मैं और मेरी तन्हाई

मैं और मेरी तन्हाई .. अक्सर ये बातें करते हैं.. तुम होती तो ऐसा होता तुम होती तो वैसा होता ..   पर अब तुम नहीं हो . .. . . . हो कैसे रहा है भाई ….

मशालों को जगाना आसान न था

मशालों को जगाना, आसान तो न था, इन तूफानों में रौशनी को बचाऊं कैसे ? तंग गलिओं से गुजरते हैं यह अँधे रस्ते, रौशन जज़्बों को मंजिल पे ले जाऊँ कैसे ? रोज खिलतीं हैं जो हवाओं में कलियाँ, उनको उनसे मुक़म्मल हो मिलाऊँ कैसे ? जो कहीं आग बरसों बसी हो दिल में, उनसे […]

दोस्ती का चश्मा चढ़ा लिया

लो भाई   दोस्तों ने बिगाड़ कर हर बार, ये कहा; इसके सुधरने का अब सवाल ही कहाँ ?   हर साल तुमसे मिल के वादा कर गए, इस साल तेरे साये से दूर ही होंगे हम, ऐसी बंदिशो से तूने जकड़ा है रूह को, ये साल भी तेरी, सोहबत में निकल गया ।   […]

बंदूके क्योंकि बोलतीं नहीं

बंदूक़ें बोलतीं हैं शोर मत करो.. सन्नाटा संगीनों के रहम पर गूँजता है अभी.. तबलों की थाप पर, मचलता था जो गीत, लोहे के क़दमताल पर चुप रूँधता है अभी … उबल जाता है, ठंडी रगों का ज़ुनून, दौड़ता फिरता था बेख़ौफ़ गलियों में कभी .. बहुत करता है, गुज़ारिश, क़त्ल कर, बरबस, क़त्ल होती, […]