Poetry

वो फिर से बुलाते हैं हमको

वो फिर से बुलाते हैं हमको.. कुछ मीठे बोलों वाले गाँव, ठंडी नीम की हिलती छाँव, तालाब में बहती चप्पू नाँव, सुबह शाम बस चाँव-चाँव, काग़ज़ी रिवाल्वर ठाँव-ठाँव, गिलहरी से फुदके नंगे पाँव, भारी दोपहरी, शीतल गाँव वो फिर से बुलाते हैं हमको..   वो फिर से बुलाते हैं हमको.. भागम भाग, पकड़म पकड़ाई, ऊँचम […]

वो अक्स कहाँ

वो अक्स कहाँ, जो मेरी मुझसे बात करा पाए, वो शख़्स कहाँ, जो बिन बोले कितनी बात बता जाए, पँखों में दम कितना होता, यह पता नहीं इस पंछी को, हो आसमान में छेद कहाँ तक, कोई तो बतला जाए दरख़्त कहाँ जो छांव भी दे, और हौसला रास्ते का, झाड़ के पत्ते अपने तन […]

रूबरू हुए, तो पूछेंगे होश से

रूबरू जब भी हुए, तो पूछेंगे होश से, जब भी मिलीं निगाहें, क्यूँ हम बेहोश थे, नशा है ये कैसा आपके, दीदारे-हुस्न में, चेहरे से कह गए, ज़ुबान से ख़ामोश थे ।   क्यों आप ही है क्या, क़ातिल मिज़ाज के? छुरियाँ, कटार रखते हैं, बड़े ही लिहाज़ से? होंठों को जो मिलाते, मुकम्मल इस […]

थोड़ी मासूमियत बचा के रखें

थोड़ी मासूमियत बचा के रख लीजिए , डाके बहुत अभी पड़ने वाले हैं, धड़कने गिनने का था यह हक़ जिनको, वो दिलों पर अब चढ़ने वाले हैं, मेरे हर एक क़सीदे की रजा़ है जिनको, वो मेरे चेहरे को पढ़ने वाले हैं, मेरे माथे की लकीरों को, पता ना चला, कब पेशानि पे बल पड़ने […]

वो खुले आसमान से बात किया करता है

यह शख़्स कौन है जो दीवार में तो रहता है पर खुले आसमान से बात किया करता है । जब मुस्कुराता है तो बादल से निकल कर के सूरज भी तेरा इस्तक़बाल किया करता है । जानते कौन कहाँ ग़ैर हुआ, कौन अपना, वो झरोखों से हाथ हिला दिया करता है । ख़ुशबुओं से अनुराग […]

वो रिश्ते खास होते हैं

साथ होते है, जब पास होते हैं, बस वही रिश्ते तो ख़ास होते हैं, हम तो ओढ़ कर हर पल उनका, जी लेते है जब भी उदास होते हैं ।   ख़ामोशियाँ, सीने पे सर रख कर, कह देती हैं सब, कुछ ना कहकर, आँखें दिल को भिगो ही देतीं है, जब भी गले तक […]

कोपल खिलखिलाती है

छोटी सी, बौरा जाती है, बार बार मचल जाती है, नव पल्लव प्रेम पसारे, तीनकों पर छा जाती है। मंजरी मुग्धमयी मंजूषा कोपल खिलखिलाती है मंद स्वर में सारिका भी, खनखनाती गुनगुनाती है। तन के मन के कोने कोने, छू छू कर बह जाती है, पवन के तनिक वेग से, पल में अकुला जाती है। […]

फ़ासले महका गयीं

ख़ुशबू यहाँ.. क्यों आ गयी, क्यों फ़ासले.. ये महका गयीं, तुम दूर थे,.. पता ना चला.. यादें तेरी जो, आसपास थीं ..   तकिए पे जो, मूँदी आँख थी, तकिया जगा हुआ, है आज भी बालों में सजे, गज़रे की महक, शानों में बसी, ..कुछ ख़ास थी । तुम दूर थे,.. पता ना चला.. यादें […]

जब वक़्त मिला मुझसे

मेरे पल पल का हिसाब लेता है, जब भी चाहे, वो बाँट लेता है, वक़्त, आज भी मिला था मुझसे, पूछा मुझको तू कैसे काट लेता है ।   मेरे माथे की शिकन है, या फिर, कुछ लकीरों ने ही खेल खेला है, कुछ समय की, नज़दीकियाँ भी उम्रभर का मानो तो साथ देता है। […]

मिलकर मिसाल गढ़ते है

चलो मिलकर मिसाल गढ़ते है, कुछ तुम करो, कुछ हम करते हैं, क़त्ल भी आधा, आधा, ही करके, ज़िंदगी को ही, बेहाल करते हैं।   क्या कहीं से है कोई, मुस्कुराया, पता करो कि वो, कहाँ से है आया, उसे दस्तूर बताओ, यहाँ का ज़रा कि, रोने वालों का ही, इस्तक़बाल करते है ।   […]