वो फिर से बुलाते हैं हमको
वो फिर से बुलाते हैं हमको.. कुछ मीठे बोलों वाले गाँव, ठंडी नीम की हिलती छाँव, तालाब में बहती चप्पू नाँव, सुबह शाम बस चाँव-चाँव, काग़ज़ी रिवाल्वर ठाँव-ठाँव, गिलहरी से फुदके नंगे पाँव, भारी दोपहरी, शीतल गाँव वो फिर से बुलाते हैं हमको.. वो फिर से बुलाते हैं हमको.. भागम भाग, पकड़म पकड़ाई, ऊँचम […]

