प्रकृति का सार
चलो बनाएँ .. जो बहती बिना थकान, स्वच्छ हवा लिए मुस्कान, चिड़ियों की ऊँची उड़ान, साफ़ सा खुला आसमान.. चलो बनाएँ .. बुलबुल चहकती हर सुबह, कोयल गाती हो तरह तरह, फलों से झुका, लदा भरा, पेड़ ऊँचे पर हर पत्ता हरा.. चलो बनाएँ …. हिम से पूरा छिपा ढका, सफ़ेद दूध जिससे […]

