Poems

  • April 5, 2019
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वो फिर से बुलाते हैं हमको

वो फिर से बुलाते हैं हमको.. कुछ मीठे बोलों वाले गाँव, ठंडी नीम की हिलती छाँव, तालाब में बहती चप्पू नाँव, सुबह शाम बस चाँव-चाँव,

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  • April 5, 2019
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वो अक्स कहाँ

वो अक्स कहाँ, जो मेरी मुझसे बात करा पाए, वो शख़्स कहाँ, जो बिन बोले कितनी बात बता जाए, पँखों में दम कितना होता, यह

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  • April 5, 2019
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रूबरू हुए, तो पूछेंगे होश से

रूबरू जब भी हुए, तो पूछेंगे होश से, जब भी मिलीं निगाहें, क्यूँ हम बेहोश थे, नशा है ये कैसा आपके, दीदारे-हुस्न में, चेहरे से

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  • April 5, 2019
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थोड़ी मासूमियत बचा के रखें

थोड़ी मासूमियत बचा के रख लीजिए , डाके बहुत अभी पड़ने वाले हैं, धड़कने गिनने का था यह हक़ जिनको, वो दिलों पर अब चढ़ने

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  • April 4, 2019
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वो खुले आसमान से बात किया करता है

यह शख़्स कौन है जो दीवार में तो रहता है पर खुले आसमान से बात किया करता है । जब मुस्कुराता है तो बादल से

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  • April 4, 2019
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वो रिश्ते खास होते हैं

साथ होते है, जब पास होते हैं, बस वही रिश्ते तो ख़ास होते हैं, हम तो ओढ़ कर हर पल उनका, जी लेते है जब

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  • April 4, 2019
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कोपल खिलखिलाती है

छोटी सी, बौरा जाती है, बार बार मचल जाती है, नव पल्लव प्रेम पसारे, तीनकों पर छा जाती है। मंजरी मुग्धमयी मंजूषा कोपल खिलखिलाती है

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  • April 4, 2019
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फ़ासले महका गयीं

ख़ुशबू यहाँ.. क्यों आ गयी, क्यों फ़ासले.. ये महका गयीं, तुम दूर थे,.. पता ना चला.. यादें तेरी जो, आसपास थीं ..   तकिए पे

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  • April 4, 2019
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जब वक़्त मिला मुझसे

मेरे पल पल का हिसाब लेता है, जब भी चाहे, वो बाँट लेता है, वक़्त, आज भी मिला था मुझसे, पूछा मुझको तू कैसे काट

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  • April 4, 2019
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मिलकर मिसाल गढ़ते है

चलो मिलकर मिसाल गढ़ते है, कुछ तुम करो, कुछ हम करते हैं, क़त्ल भी आधा, आधा, ही करके, ज़िंदगी को ही, बेहाल करते हैं।  

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