- April 8, 2019
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कजरी के जैसी शाम हुई
कजरी के जैसी शाम हुई, दोपहर भी उसके नाम हुई, भर आयी आँख गगन की, बदरी बिखर के तमाम हुई,
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- April 8, 2019
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अम्बर आज,विस्तार बहो उस कारण, इस धार अहो।
अम्बर आज,विस्तार बहो उस कारण, इस धार अहो। चंद्र दिवाकर, तेरे भूषण नव नलिनी, कंचन, कण-कण, रस माधुरी, मेघ, मयार१
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- April 8, 2019
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बहुत बहुत ईद मुबारक!!
दरवाज़ों पर पढ़ा था मैंने, लिखा था, आना तो दिल खोल आना, जो क़दमों में घबराहट दें, ऐसी ज़ंजीरों को
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- April 8, 2019
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छू आयी है…..
छू आयी है उन कणों को, जो गहरे छिपे हुए सुरम्य, नरम से आकाश में बहते, कभी ललिमा के से
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- April 8, 2019
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मेरा सरमाया हुआ
रात में रौशनी से नहाया हुआ, महताब भी है, क्या शर्माया हुआ, मिले जो हमनवा रात रास्ते पे, बचपना काँधे
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- April 8, 2019
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अब तो कहने को बस, ये ही अदब है
तुम पियो तो जानिब, मेरे होश गुमाँ, ख़ुश्क होती हुई, साँसो को तलब है, तुम्हारे तर लबों पर, मिलतीं
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- April 8, 2019
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मैं और मेरी तन्हाई
मैं और मेरी तन्हाई .. अक्सर ये बातें करते हैं.. तुम होती तो ऐसा होता तुम होती तो वैसा होता
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- April 8, 2019
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मशालों को जगाना आसान न था
मशालों को जगाना, आसान तो न था, इन तूफानों में रौशनी को बचाऊं कैसे ? तंग गलिओं से गुजरते हैं
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- April 8, 2019
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दोस्ती का चश्मा चढ़ा लिया
लो भाई दोस्तों ने बिगाड़ कर हर बार, ये कहा; इसके सुधरने का अब सवाल ही कहाँ ?
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- April 8, 2019
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बंदूके क्योंकि बोलतीं नहीं
बंदूक़ें बोलतीं हैं शोर मत करो.. सन्नाटा संगीनों के रहम पर गूँजता है अभी.. तबलों की थाप पर, मचलता था
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- April 8, 2019
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लगाम दिए बैठे
मुद्दतों से, अभी भी एक आस लिए बैठें हैं .. होश में हैं, जो तेरी आवाज़ लिए बैठें है.. रुबरू
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- April 5, 2019
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नभ विचरित
स्मिता यत्र नभ विचरित, व्योम विभाकर आनंदित, अरुणिम आभा चित्रप्रभा, पंख पसारे प्रफुल्ल प्रद्, प्रपुष्पित हो देवाय पुंज, किलकिलाती काय
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