- April 4, 2019
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वो खुले आसमान से बात किया करता है
यह शख़्स कौन है जो दीवार में तो रहता है पर खुले आसमान से बात किया करता है । जब
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- April 4, 2019
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वो रिश्ते खास होते हैं
साथ होते है, जब पास होते हैं, बस वही रिश्ते तो ख़ास होते हैं, हम तो ओढ़ कर हर पल
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- April 4, 2019
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कोपल खिलखिलाती है
छोटी सी, बौरा जाती है, बार बार मचल जाती है, नव पल्लव प्रेम पसारे, तीनकों पर छा जाती है। मंजरी
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- April 4, 2019
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फ़ासले महका गयीं
ख़ुशबू यहाँ.. क्यों आ गयी, क्यों फ़ासले.. ये महका गयीं, तुम दूर थे,.. पता ना चला.. यादें तेरी जो, आसपास
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- April 4, 2019
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जब वक़्त मिला मुझसे
मेरे पल पल का हिसाब लेता है, जब भी चाहे, वो बाँट लेता है, वक़्त, आज भी मिला था मुझसे,
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- April 4, 2019
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मिलकर मिसाल गढ़ते है
चलो मिलकर मिसाल गढ़ते है, कुछ तुम करो, कुछ हम करते हैं, क़त्ल भी आधा, आधा, ही करके, ज़िंदगी को
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- April 4, 2019
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प्रकृति का सार
चलो बनाएँ .. जो बहती बिना थकान, स्वच्छ हवा लिए मुस्कान, चिड़ियों की ऊँची उड़ान, साफ़ सा खुला आसमान..
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- April 4, 2019
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घर की दीवारी
भीतर अंदर घर की दीवारी, दुबक के बैठा, सपना भारी, दोनों घुटनों के दरमियाँ में, सिसकतीं सांसें, बारी बारी I
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- April 4, 2019
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चलो ज़रा, चमन चुराएँ
चलो ज़रा सा, चमन चुराएँ.. ना मेरे मन का, ना तेरे मन का, जो सबका है, वो गगन छुड़ाएँ.. चलो
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- April 4, 2019
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वो माँ कहलाती
वो ख़ून की लकीरें, आवाज़ें और चीख़ें, नसों का ताना जाना, जिस्म को फाड़ पाना, हड्डियों की जकड़न, मस्तिष्क की
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- April 4, 2019
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सही और गलत को नापता हूँ
सही और ग़लत के बीच; नापता हूँ, तो फ़ासला नहीं मिलता, मिलता है तो बस कि हवा किस ओर को
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- April 4, 2019
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ख़ूबसूरती तो काफ़िर ही कहलाएगी
ग़ौर से देखो तो फिर नज़र आएगी, दरमियाँ दफ़्न है, क्यों दिखलाएगी; ख़ूबसूरती तो काफ़िर ही कहलाएगी, जो बचा के
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